बिप्र धेनु सुर संत हित, लीन्ह मनुज अवतार ।
निज इच्छा निर्मित तनु, माया गुन गो पार ॥
KARTARPUR EXCLUSIVE (BEURO) 03-04-2025 | रामनवमी का त्यौहार चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी को मनाया जाता है | हिंदू धर्मशास्त्रों के अनुसार इस दिन मर्यादा-पुरूषोत्तम भगवान श्री राम जी का जन्म हुआ था। हिन्दू धर्म में राम नवमी विशेष महत्व रखती है.यह पर्व हर साल चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाया जाता है. इस दिन भगवान श्रीराम की विधि-विधान से पूजा अर्चना की जाती है. मान्यता है इस दिन मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की पूजा करने से साधक के जीवन में सुख शांति बनी रहती है और जीवन में आने वाली सभी परेशानियों से मुक्ति भी मिलती है. इस दिन मां दुर्गा के नौवें रूप यानी सिद्धिदात्री की भी उपासना की जाती है.
तुलसीदास जी ने रामचरितमानस मे मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के प्राकटय का वर्णन बहुत सुंदर किया है
नौमी तिथि मधु मास पुनीता। सुकल पच्छ अभिजित हरिप्रीता॥
मध्यदिवस अति सीत न घामा। पावन काल लोक बिश्रामा॥1॥
भावार्थ:-पवित्र चैत्र का महीना था, नवमी तिथि थी। शुक्ल पक्ष और भगवान का प्रिय अभिजित् मुहूर्त था। दोपहर का समय था। न बहुत सर्दी थी, न धूप (गरमी) थी। वह पवित्र समय सब लोकों को शांति देने वाला था॥1॥
* सीतल मंद सुरभि बह बाऊ। हरषित सुर संतन मन चाऊ॥
बन कुसुमित गिरिगन मनिआरा। स्रवहिं सकल सरिताऽमृतधारा॥2॥
भावार्थ:-शीतल, मंद और सुगंधित पवन बह रहा था। देवता हर्षित थे और संतों के मन में (बड़ा) चाव था। वन फूले हुए थे, पर्वतों के समूह मणियों से जगमगा रहे थे और सारी नदियाँ अमृत की धारा बहा रही थीं॥2॥
* सो अवसर बिरंचि जब जाना। चले सकल सुर साजि बिमाना॥
गगन बिमल संकुल सुर जूथा। गावहिं गुन गंधर्ब बरूथा॥3॥
भावार्थ:-जब ब्रह्माजी ने वह (भगवान के प्रकट होने का) अवसर जाना तब (उनके समेत) सारे देवता विमान सजा-सजाकर चले। निर्मल आकाश देवताओं के समूहों से भर गया। गंधर्वों के दल गुणों का गान करने लगे॥3॥
* बरषहिं सुमन सुअंजुलि साजी। गहगहि गगन दुंदुभी बाजी॥
अस्तुति करहिं नाग मुनि देवा। बहुबिधि लावहिं निज निज सेवा॥4॥
भावार्थ:-और सुंदर अंजलियों में सजा-सजाकर पुष्प बरसाने लगे। आकाश में घमाघम नगाड़े बजने लगे। नाग, मुनि और देवता स्तुति करने लगे और बहुत प्रकार से अपनी-अपनी सेवा (उपहार) भेंट करने लगे॥4॥
दोहा :
* सुर समूह बिनती करि पहुँचे निज निज धाम।
जगनिवास प्रभु प्रगटे अखिल लोक बिश्राम॥191
भावार्थ:-देवताओं के समूह विनती करके अपने-अपने लोक में जा पहुँचे। समस्त लोकों को शांति देने वाले, जगदाधार प्रभु प्रकट हुए॥
जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, राम नवमी शोभा यात्रा भगवान राम के जन्मदिन के उपलक्ष्य में किसी भी शहर में निकाली जाने वाली एक बड़ी शोभायात्रा है। पालकी (पालकी) या पालकी, जिसमें भगवान राम की मूर्ति होती है, को भक्तगण ले जाते हैं। उनमें से कई लोग नाचते-गाते, भजन गाते और भगवान राम की स्तुति करते है |
राम नवमी पर, कई भक्त आठ प्रहर का व्रत रखते हैं, जो सूर्योदय से सूर्यास्त तक चलता है। आप या तो व्रत का पालन कर सकते हैं और सूर्यास्त के बाद इसे तोड़ सकते हैं या आप पूजा तक उपवास जारी रख सकते हैं और फिर अपना नियमित आहार फिर से शुरू कर सकते हैं।अयोध्या (रामनगरी) में नव संवत्सर के साथ ही रामनवमी मेले का भी शुभारंभ हो गया है। रामनगरी के आठ हजार मंदिरों में कथा-प्रवचन व अनुष्ठानों के साथ-साथ बधाई गान गूंजने लगे हैं। रामनगरी नौ दिनों तक शक्ति उपासना में डूबी रहेगी। राम मंदिर से लेकर अन्य प्रमुख मंदिरों में अनुष्ठानों का दौर शुरू हो गया है।

राम नवमी की तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
रामनवमी की पूजा का शुभ समय 06 अप्रैल को सुबह 11:08 मिनट से लेकर दोपहर 01:39 मिनट तक है.
पंचांग के अनुसार, चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि 05 अप्रैल को शाम 07:26 मिनट पर शुरू होगी, जो अगले दिन यानी 06 अप्रैल को शाम 07:22 मिनट पर समाप्त हो जाएगी. हिन्दू धर्म में उदया तिथि खास मायने रखती है इसलिए राम नवमी का पर्व 06 अप्रैल को मनाया जाएगा.
- रामनवमी की पूजा का शुभ समय 06 अप्रैल को सुबह 11:08 मिनट से लेकर दोपहर 01:39 मिनट तक है.
- वहीं, दोपहर 12:24 मिनट पर भी है. इन दोनों शुभ समय में साधक भगवान श्रीराम की पूजा कर सकते हैं.
राम नवमी पूजा विधि
- इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और भगवान श्रीराम का ध्यान करके व्रत का संकल्प लीजिए.
- इसके बाद पूजा घर में गंगाजल छिड़कर शुद्ध करें.
- अब आप पूजा घर में चौकी रखें और उसपर पीले रंग का वस्त्र बिछाकर भगवान राम की परिवार सहित प्रतिमा स्थापित करें.
- अब आप इस समय भगवान राम का ध्यान कर उनका आह्वान करें.
- इसके बाद पंचोपचार कर राम परिवार संग भक्त हनुमान की भी पूजा करिए.
- अब आप राम स्त्रोत और राम चालीसा का पाठ करिए.
- फिर अंत में आरती कर पूजा संपन्न करें.
- भए प्रगट कृपाला दीनदयाला,
कौसल्या हितकारी ।
हरषित महतारी, मुनि मन हारी,
अद्भुत रूप बिचारी ॥ - लोचन अभिरामा, तनु घनस्यामा,
निज आयुध भुजचारी ।
भूषन बनमाला, नयन बिसाला,
सोभासिंधु खरारी ॥ - कह दुइ कर जोरी, अस्तुति तोरी,
केहि बिधि करूं अनंता ।
माया गुन ग्यानातीत अमाना,
वेद पुरान भनंता ॥ - करुना सुख सागर, सब गुन आगर,
जेहि गावहिं श्रुति संता ।
सो मम हित लागी, जन अनुरागी,
भयउ प्रगट श्रीकंता ॥ - ब्रह्मांड निकाया, निर्मित माया,
रोम रोम प्रति बेद कहै ।
मम उर सो बासी, यह उपहासी,
सुनत धीर मति थिर न रहै ॥ - उपजा जब ग्याना, प्रभु मुसुकाना,
चरित बहुत बिधि कीन्ह चहै ।
कहि कथा सुहाई, मातु बुझाई,
जेहि प्रकार सुत प्रेम लहै ॥ - माता पुनि बोली, सो मति डोली,
तजहु तात यह रूपा ।
कीजै सिसुलीला, अति प्रियसीला,
यह सुख परम अनूपा ॥ - सुनि बचन सुजाना, रोदन ठाना,
होइ बालक सुरभूपा ।
यह चरित जे गावहिं, हरिपद पावहिं,
ते न परहिं भवकूपा ॥